सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सिंधु तीर एक भूधर सुंदर। कौतुक कूदि चढ़ेउ ता ऊपर।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दसमुद्रके तीरपर एक सुन्दर पर्वत था। हनुमान्जी खेलसे ही (अनायास ही) कूदकर उसके ऊपर जा चढ़े और बार-बार श्रीरघुवीरका स्मरण करके अत्यन्त बलवान् हनुमान्जी उसपरसे बड़े वेगसे उछले॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 714 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सिंधु तीर एक भूधर सुंदर। कौतुक कूदि चढ़ेउ ता ऊपर।।
बार बार रघुबीर सँभारी। तरकेउ पवनतनय बल भारी।।
स्रोत अभिलेख 5.1 · पुस्तक पृ. 714, 715
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सिंधु तीर एक भूधर सुंदर। कौतुक कूदि चढ़ेउ ता ऊपर।।
English explanation
There was a beautiful mountain on the seashore. Hanuman playfully leaped up onto it.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सिंधु | समुद्र | the ocean |
| तीर | के किनारे | on the shore of |
| एक | एक | a |
| भूधर | पर्वत | mountain |
| सुंदर | सुंदर | beautiful |
| कौतुक | खेल-भाव से; सहज ही | playfully; with ease |
| कूदि | कूदकर | leaping |
| चढ़ेउ | चढ़ गए | climbed up |
| ता | उसके | that mountain’s |
| ऊपर | ऊपर | on top |
2 बार बार रघुबीर सँभारी। तरकेउ पवनतनय बल भारी।।
English explanation
Remembering Rama again and again, Hanuman, the wind-god’s son, sprang forward with immense force.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बार | बार | time |
| बार | बार; फिर | after time; again |
| रघुबीर | रघुवीर, श्रीराम को | Rama, hero of Raghu’s lineage |
| सँभारी | स्मरण करके | remembering |
| तरकेउ | उछले; छलाँग लगाई | sprang forward; leaped |
| पवनतनय | पवनपुत्र हनुमान | Hanuman, son of the wind-god |
| बल | बल से | with force |
| भारी | अत्यंत प्रबल | immense |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.1
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 714
- सहायक विषय
- हनुमान्जीका लङ्काको प्रस्थान, सुरसासे भेंट, छाया पकड़नेवाली राक्षसीका वध
- मुद्रित पृष्ठ
- 714, 715
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।