सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जब लगि आवौं सीतहि देखी। होइहि काजु मोहि हरष बिसेषी।।
मूल पाठ
जब लगि आवौं सीतहि देखी। होइहि काजु मोहि हरष बिसेषी।।
यह कहि नाइ सबन्हि कहुँ माथा। चलेउ हरषि हियँ धरि रघुनाथा।।
स्रोत अभिलेख 5.1 · पुस्तक पृ. 714, 715
भावार्थ
मूल पाठ के बादजबतक मैं सीताजीको देखकर [लौट] न आऊँ। काम अवश्य होगा, क्योंकि मुझे बहुत ही हर्ष हो रहा है। यह कहकर और सबको मस्तक नवाकर तथा हृदयमें श्रीरघुनाथजीको धारण करके हनुमान्जी हर्षित होकर चले॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 714 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जब लगि आवौं सीतहि देखी। होइहि काजु मोहि हरष बिसेषी।।
English explanation
Until I return after seeing Sita. The task will succeed; I feel great joy.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जब | जब | when |
| लगि | तक | until |
| आवौं | मैं लौट आऊँ | I return |
| सीतहि | सीता को | Sita, Rama’s wife |
| देखी | देखकर | having seen |
| होइहि | होगा; सफल होगा | will be accomplished |
| काजु | कार्य | the task |
| मोहि | मुझे | to me |
| हरष | आनंद | joy |
| बिसेषी | विशेष; बहुत अधिक | great; exceptional |
2 यह कहि नाइ सबन्हि कहुँ माथा। चलेउ हरषि हियँ धरि रघुनाथा।।
English explanation
Saying this and bowing his head to everyone, Hanuman set out joyfully, holding Rama in his heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| यह | यह | this |
| कहि | कहकर | having said |
| नाइ | झुकाकर | bowing |
| सबन्हि | सभी | everyone |
| कहुँ | को | to |
| माथा | सिर | his head |
| चलेउ | चल पड़े | set out |
| हरषि | प्रसन्न होकर | joyfully |
| हियँ | हृदय में | in his heart |
| धरि | धारण करके | holding |
| रघुनाथा | रघुनाथ, श्रीराम को | Rama, lord of Raghu’s lineage |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.1
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 714
- सहायक विषय
- हनुमान्जीका लङ्काको प्रस्थान, सुरसासे भेंट, छाया पकड़नेवाली राक्षसीका वध
- मुद्रित पृष्ठ
- 714, 715
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।