सुन्दरकाण्ड · दोहा 60 · दोहा/सोरठा
सकल सुमंगल दायक रघुनायक गुन गान।
सकल सुमंगल दायक रघुनायक गुन गान।
सादर सुनहिं ते तरहिं भव सिंधु बिना जलजान।।60।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 5.6 · पुस्तक पृ. 768, 769
भावार्थ और शब्दार्थ
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1सकल सुमंगल दायक रघुनायक गुन गान।
रघुकुल के नायक राम के गुणों का गान सब प्रकार के शुभ मंगल देने वाला है।
English explanation
Singing the virtues of Rama, leader of Raghu’s line, bestows every kind of auspicious blessing.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सकल | सब प्रकार के | every kind of |
| सुमंगल | शुभ मंगल | auspicious blessings |
| दायक | देने वाला | bestowing |
| रघुनायक | रघुकुल के नायक राम के | of Rama, leader of Raghu’s line |
| गुन | गुणों का | of the virtues |
| गान | गान | singing |
2 सादर सुनहिं ते तरहिं भव सिंधु बिना जलजान।।60।।
जो इसे आदरपूर्वक सुनते हैं, वे बिना जहाज के ही संसार-सागर पार कर जाते हैं।
English explanation
Those who listen reverently cross the ocean of worldly existence without a ship.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सादर | आदरपूर्वक | reverently |
| सुनहिं | सुनते हैं | listen |
| ते | वे | they |
| तरहिं | पार कर जाते हैं | cross |
| भव | संसाररूपी | of worldly existence |
| सिंधु | समुद्र | ocean |
| बिना | बिना | without |
| जलजान | जहाज | a ship |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 60
- स्रोत अभिलेख
- 5.6
- सहायक विषय
- समुद्रपर श्रीरामजीका क्रोध और समुद्रकी विनती · श्रीराम-गुणगानकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 768, 769
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