लङ्काकाण्ड · दोहा 1 · दोहा/सोरठा
अति उतंग गिरि पादप लीलहिं लेहिं उठाइ।
अति उतंग गिरि पादप लीलहिं लेहिं उठाइ।
आनि देहिं नल नीलहि रचहिं ते सेतु बनाइ।।1।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.1 · पुस्तक पृ. 772, 773
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1अति उतंग गिरि पादप लीलहिं लेहिं उठाइ।
वे बहुत ऊँचे पर्वतों और वृक्षों को सहज खेल की तरह उठा लेते हैं।
English explanation
They lift exceedingly tall mountains and trees with playful ease.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अति | बहुत | exceedingly |
| उतंग | ऊँचे | tall |
| गिरि | पर्वत | mountains |
| पादप | वृक्ष | trees |
| लीलहिं | सहज खेल की तरह | with playful ease |
| लेहिं | ले लेते हैं | take up |
| उठाइ | उठाकर | lifting |
2 आनि देहिं नल नीलहि रचहिं ते सेतु बनाइ।।1।।
उन्हें लाकर नल और नील को देते हैं; वे दोनों उन्हें व्यवस्थित करके सेतु बनाते हैं।
English explanation
They bring them and give them to Nala and Nila; those two arrange them and construct the bridge.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आनि | लाकर | bringing |
| देहिं | देते हैं | give |
| नल | वानर सेतु-निर्माता नल | Nala, the monkey bridge-builder |
| नीलहि | वानर नील को | to Nila, the monkey leader |
| रचहिं | रचना करते हैं; व्यवस्थित करते हैं | arrange; construct |
| ते | वे दोनों | those two |
| सेतु | पुल | bridge |
| बनाइ | बनाकर | building |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 1
- स्रोत अभिलेख
- 6.1
- सहायक विषय
- मंगलाचरण
- मुद्रित पृष्ठ
- 772, 773
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