सुन्दरकाण्ड · दोहा 59 · दोहा/सोरठा
सुनत बिनीत बचन अति कह कृपाल मुसुकाइ।
सुनत बिनीत बचन अति कह कृपाल मुसुकाइ।
जेहि बिधि उतरै कपि कटकु तात सो कहहु उपाइ।।59।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 5.59 · पुस्तक पृ. 767, 768
भावार्थ और शब्दार्थ
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1सुनत बिनीत बचन अति कह कृपाल मुसुकाइ।
अत्यंत विनम्र वचन सुनकर कृपालु राम मुस्कराते हुए बोले।
English explanation
Hearing these very humble words, compassionate Rama smiled and spoke.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनत | सुनकर | on hearing |
| बिनीत | विनम्र | humble |
| बचन | वचन | words |
| अति | अत्यंत | very |
| कह | बोले | said |
| कृपाल | कृपालु राम | compassionate Rama |
| मुसुकाइ | मुस्कराकर | smiling |
2 जेहि बिधि उतरै कपि कटकु तात सो कहहु उपाइ।।59।।
हे तात, जिस प्रकार वानर-सेना पार उतर सके, वह उपाय बताओ।
English explanation
Dear one, tell me the means by which the monkey army can cross.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जेहि | जिस | by which |
| बिधि | विधि से | method |
| उतरै | पार उतर सके | may cross |
| कपि | वानरों की | of monkeys |
| कटकु | सेना | army |
| तात | हे प्रिय | dear one |
| सो | वह | that |
| कहहु | बताओ | tell me |
| उपाइ | उपाय | means |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 59
- स्रोत अभिलेख
- 5.59
- सहायक विषय
- समुद्रपर श्रीरामजीका क्रोध और समुद्रकी विनती
- मुद्रित पृष्ठ
- 767, 768
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