सुन्दरकाण्ड · दोहा 58 · दोहा/सोरठा
काटेहिं पइ कदरी फरइ कोटि जतन कोउ सींच।
काटेहिं पइ कदरी फरइ कोटि जतन कोउ सींच।
बिनय न मान खगेस सुनु डाटेहिं पइ नव नीच।।58।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 5.58 · पुस्तक पृ. 766, 767
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1काटेहिं पइ कदरी फरइ कोटि जतन कोउ सींच।
केला काटने पर ही फलता है, चाहे कोई करोड़ों उपाय करके उसे सींचे।
English explanation
The banana plant bears fruit only when cut, however many millions of efforts one makes to water it.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| काटेहिं | काटने पर ही | only upon being cut |
| पइ | ही, तभी | only then |
| कदरी | केले का पौधा | the banana plant |
| फरइ | फलता है | bears fruit |
| कोटि | करोड़ों | millions of |
| जतन | उपाय या प्रयत्न करके | with efforts or measures |
| कोउ | कोई भी | anyone |
| सींच | सींचे | may water it |
2 बिनय न मान खगेस सुनु डाटेहिं पइ नव नीच।।58।।
हे पक्षिराज गरुड़, सुनो: नीच व्यक्ति विनय नहीं मानता; डाँटने पर ही झुकता है।
English explanation
Listen, Garuda, king of birds: a base person does not heed entreaty and bows only when rebuked.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिनय | विनती | entreaty |
| न | नहीं | not |
| मान | मानता, स्वीकार करता | heeds or accepts |
| खगेस | हे पक्षिराज गरुड़ | O Garuda, king of birds |
| सुनु | सुनो | listen |
| डाटेहिं | डाँटने पर ही | only when rebuked |
| पइ | ही, तभी | only then |
| नव | झुकता है | bows or yields |
| नीच | नीच व्यक्ति | a base person |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 58
- स्रोत अभिलेख
- 5.58
- सहायक विषय
- समुद्रपर श्रीरामजीका क्रोध और समुद्रकी विनती
- मुद्रित पृष्ठ
- 766, 767
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।