सुन्दरकाण्ड · दोहा 14 · दोहा/सोरठा
रघुपति कर संदेसु अब सुनु जननी धरि धीर।
रघुपति कर संदेसु अब सुनु जननी धरि धीर।
अस कहि कपि गद गद भयउ भरे बिलोचन नीर।।14।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 5.14 · पुस्तक पृ. 727, 728
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1रघुपति कर संदेसु अब सुनु जननी धरि धीर।
हे माता! अब धैर्य धारण करके राम का संदेश सुनिए।
English explanation
Mother, now steady yourself and hear Rama’s message.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रघुपति | रघुवंश के स्वामी राम | Rama, lord of the Raghu lineage |
| कर | का | of |
| संदेसु | संदेश | message |
| अब | अब | now |
| सुनु | सुनिए | listen |
| जननी | हे माता | O mother |
| धरि | धारण करके | having mustered |
| धीर | धैर्य | composure |
2 अस कहि कपि गद गद भयउ भरे बिलोचन नीर।।14।।
ऐसा कहकर हनुमान भावावेश से गद्गद हो गए और उनकी आँखें आँसुओं से भर गईं।
English explanation
Saying this, Hanuman became choked with emotion, and his eyes filled with tears.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसा | thus |
| कहि | कहकर | having said |
| कपि | वानर हनुमान | Hanuman, the monkey messenger |
| गद | भाव से रुँधे कंठ वाले पद का पहला अंश | first part of ‘choked with emotion’ |
| गद | भाव से रुँधे कंठ वाले पद का दूसरा अंश | second part of ‘choked with emotion’ |
| भयउ | हो गए | became |
| भरे | भर गए | filled |
| बिलोचन | नेत्र | eyes |
| नीर | आँसुओं से | with tears |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 14
- स्रोत अभिलेख
- 5.14
- सहायक विषय
- श्रीसीता-हनुमान्-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 727, 728
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