सुन्दरकाण्ड · दोहा 13 · दोहा/सोरठा
कपि के बचन सप्रेम सुनि उपजा मन बिस्वास।।
कपि के बचन सप्रेम सुनि उपजा मन बिस्वास।।
जाना मन क्रम बचन यह कृपासिंधु कर दास।।13।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 5.13 · पुस्तक पृ. 726, 727
भावार्थ और शब्दार्थ
1कपि के बचन सप्रेम सुनि उपजा मन बिस्वास।।
हनुमान के प्रेमभरे वचन सुनकर सीता के मन में विश्वास उत्पन्न हुआ।
English explanation
Hearing Hanuman’s loving words, trust arose in Sita’s mind.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कपि | वानर हनुमान | Hanuman, the monkey messenger |
| के | के | of; possessive marker |
| बचन | वचन | words |
| सप्रेम | प्रेम से भरे | loving; filled with affection |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| उपजा | उत्पन्न हुआ | arose |
| मन | मन में | in her mind |
| बिस्वास | विश्वास | trust |
2 जाना मन क्रम बचन यह कृपासिंधु कर दास।।13।।
सीता ने जान लिया कि यह हनुमान मन, कर्म और वचन से कृपा के सागर राम के सेवक हैं; यहाँ ‘क्रम’ का पाठ संदिग्ध है।
English explanation
Sita understood that Hanuman was a servant of Rama, the ocean of grace, in thought, deed, and speech; the supplied reading ‘क्रम’ is uncertain here.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जाना | जान लिया; समझ लिया | understood; recognized |
| मन | मन से; विचार में | in mind; in thought |
| क्रम | संभवतः कर्म से | probably in deed |
| बचन | वचन से | in speech |
| यह | यह हनुमान | this one, Hanuman |
| कृपासिंधु | कृपा के सागर राम | Rama, ocean of grace |
| कर | के | of; possessive marker |
| दास | सेवक | servant |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 13
- स्रोत अभिलेख
- 5.13
- सहायक विषय
- श्रीसीता-हनुमान्-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 726, 727
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।