सुन्दरकाण्ड · दोहा 39 (ख) · दोहा/सोरठा
मुनि पुलस्ति निज सिष्य सन कहि पठई यह बात।
मुनि पुलस्ति निज सिष्य सन कहि पठई यह बात।
तुरत सो मैं प्रभु सन कही पाइ सुअवसरु तात।।39(ख)।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 5.39 · पुस्तक पृ. 749, 750
भावार्थ और शब्दार्थ
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1 मुनि पुलस्ति निज सिष्य सन कहि पठई यह बात।
मुनि पुलस्त्य ने अपने शिष्य से यह बात कहकर संदेश भेजा था।
English explanation
Sage Pulastya sent this message through his own disciple.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुनि | ऋषि | sage |
| पुलस्ति | पुलस्त्य ऋषि, रावण के पितामह | Pulastya, Ravana’s grandfather |
| निज | अपने | his own |
| सिष्य | शिष्य | disciple |
| सन | से | to; through |
| कहि | कहकर | having told |
| पठई | भेजी | sent |
| यह | यह | this |
| बात | बात; संदेश | message |
2 तुरत सो मैं प्रभु सन कही पाइ सुअवसरु तात।।39(ख)।।
हे तात, अच्छा अवसर पाकर मैंने वही बात तुरंत आपसे कह दी है।
English explanation
Dear brother, finding a suitable opportunity, I have promptly conveyed that message to you, my lord.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुरत | तुरंत | promptly |
| सो | वही बात | that message |
| मैं | मैंने | I |
| प्रभु | आप, हे स्वामी | you, my lord |
| सन | से | to |
| कही | कह दी | conveyed |
| पाइ | पाकर | having found |
| सुअवसरु | उचित अवसर | a suitable opportunity |
| तात | हे प्रिय भाई | dear brother |
| ख | पद-संदर्भ चिह्न ‘ख’ | verse reference marker ‘ख’ |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 39 (ख)
- स्रोत अभिलेख
- 5.39
- सहायक विषय
- रावणको विभीषणका समझाना और विभीषणका अपमान
- मुद्रित पृष्ठ
- 749, 750
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