सुन्दरकाण्ड · दोहा 39 (क) · दोहा/सोरठा
बार बार पद लागउँ बिनय करउँ दससीस।
बार बार पद लागउँ बिनय करउँ दससीस।
परिहरि मान मोह मद भजहु कोसलाधीस।।39(क)।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 5.39 · पुस्तक पृ. 749, 750
भावार्थ और शब्दार्थ
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1बार बार पद लागउँ बिनय करउँ दससीस।
हे दशशीश रावण, मैं बार-बार तुम्हारे चरणों में पड़कर विनती करता हूँ।
English explanation
Ten-headed Ravana, I repeatedly bow at your feet and entreat you.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बार | बार | time |
| बार | बार; फिर | after time; again |
| पद | चरणों में | at your feet |
| लागउँ | मैं पड़ता हूँ | I bow down |
| बिनय | विनती | an entreaty |
| करउँ | मैं करता हूँ | I make |
| दससीस | हे दस सिर वाले रावण | O ten-headed Ravana |
2 परिहरि मान मोह मद भजहु कोसलाधीस।।39(क)।।
अभिमान, मोह और मद छोड़कर कोसल के स्वामी राम का भजन करो।
English explanation
Abandon pride, delusion, and arrogance, and worship Rama, lord of Kosala.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| परिहरि | छोड़कर | having abandoned |
| मान | अभिमान | pride |
| मोह | मोह | delusion; attachment |
| मद | मद; अहंकार | arrogance |
| भजहु | भजन करो | worship |
| कोसलाधीस | कोसल के स्वामी राम | Rama, lord of Kosala |
| क | पद-संदर्भ चिह्न ‘क’ | verse reference marker ‘क’ |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 39 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 5.39
- सहायक विषय
- रावणको विभीषणका समझाना और विभीषणका अपमान
- मुद्रित पृष्ठ
- 749, 750
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