सुन्दरकाण्ड · दोहा 38 · दोहा/सोरठा
काम क्रोध मद लोभ सब नाथ नरक के पंथ।
काम क्रोध मद लोभ सब नाथ नरक के पंथ।
सब परिहरि रघुबीरहि भजहु भजहिं जेहि संत।।38।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 5.38 · पुस्तक पृ. 748, 749
भावार्थ और शब्दार्थ
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1 काम क्रोध मद लोभ सब नाथ नरक के पंथ।
हे नाथ, काम, क्रोध, अहंकार और लोभ—ये सब नरक के मार्ग हैं।
English explanation
My lord, lust, anger, arrogance, and greed are all paths to hell.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| काम | कामवासना | lust |
| क्रोध | क्रोध | anger |
| मद | अहंकार | arrogance |
| लोभ | लोभ | greed |
| सब | ये सभी | all these |
| नाथ | हे स्वामी | my lord |
| नरक | नरक | hell |
| के | के; की ओर जाने वाले | to; leading to |
| पंथ | मार्ग | paths |
2 सब परिहरि रघुबीरहि भजहु भजहिं जेहि संत।।38।।
इन सबको छोड़कर श्रीराम का भजन कीजिए, जिनका संत भजन करते हैं।
English explanation
Abandon all these and worship Rama, whom the saints worship.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सब | इन सभी दोषों को | all these faults |
| परिहरि | त्यागकर | abandoning |
| रघुबीरहि | रघुवंश के वीर श्रीराम को | Rama, the hero of Raghu’s lineage |
| भजहु | भजिए; उपासना कीजिए | worship; devote yourself to |
| भजहिं | भजते हैं | worship |
| जेहि | जिनको | whom |
| संत | संतजन | saints |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 38
- स्रोत अभिलेख
- 5.38
- सहायक विषय
- मन्दोदरी-रावण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 748, 749
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