सुन्दरकाण्ड · दोहा 37 · दोहा/सोरठा
सचिव बैद गुर तीनि जौं प्रिय बोलहिं भय आस।
सचिव बैद गुर तीनि जौं प्रिय बोलहिं भय आस।
राज धर्म तन तीनि कर होइ बेगिहीं नास।।37।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 5.37 · पुस्तक पृ. 748, 748
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1सचिव बैद गुर तीनि जौं प्रिय बोलहिं भय आस।
यदि मंत्री, वैद्य और गुरु—ये तीन—भय या लाभ की आशा से केवल प्रिय बातें कहें,
English explanation
If a minister, physician, and teacher—these three—say only pleasing things out of fear or hope of gain,
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सचिव | मंत्री, सलाहकार | minister, adviser |
| बैद | वैद्य, चिकित्सक | physician |
| गुर | गुरु, मार्गदर्शक | teacher, spiritual guide |
| तीनि | तीनों | all three |
| जौं | यदि | if |
| प्रिय | प्रिय लगने वाली बातें | pleasing things |
| बोलहिं | कहते हैं | say |
| भय | भय के कारण | out of fear |
| आस | लाभ की आशा से | in hope of gain |
2 राज धर्म तन तीनि कर होइ बेगिहीं नास।।37।।
तो राज्य, धर्म और शरीर—इन तीनों का शीघ्र ही नाश हो जाता है।
English explanation
then the kingdom, religious duty, and body—all three—soon perish.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राज | राज्य | kingdom |
| धर्म | धर्म, धार्मिक आचरण | religious duty and conduct |
| तन | शरीर | body |
| तीनि | तीनों | all three |
| कर | का | of |
| होइ | होता है | occurs |
| बेगिहीं | शीघ्र ही | very soon |
| नास | नाश | destruction |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 37
- स्रोत अभिलेख
- 5.37
- सहायक विषय
- मन्दोदरी-रावण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 748, 748
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।