सुन्दरकाण्ड · दोहा 36 · दोहा/सोरठा
-राम बान अहि गन सरिस निकर निसाचर भेक।
-राम बान अहि गन सरिस निकर निसाचर भेक।
जब लगि ग्रसत न तब लगि जतनु करहु तजि टेक।।36।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 5.36 · पुस्तक पृ. 747, 747
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1-राम बान अहि गन सरिस निकर निसाचर भेक।
राम के बाण सर्पों के समूह जैसे हैं और राक्षसों के झुंड मेंढकों जैसे हैं।
English explanation
Rama’s arrows are like hosts of snakes, and the demon hordes are like frogs.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | राम के | Rama’s |
| बान | बाण | arrows |
| अहि | सर्प | snakes |
| गन | समूह | hosts; groups |
| सरिस | के समान | like |
| निकर | झुंड; समूह | hordes; groups |
| निसाचर | राक्षस | demons |
| भेक | मेंढक | frogs |
2 जब लगि ग्रसत न तब लगि जतनु करहु तजि टेक।।36।।
जब तक वे उन्हें निगल नहीं लेते, तब तक अपनी हठ छोड़कर बचाव का उपाय कीजिए।
English explanation
Before those arrows devour the demons, abandon your obstinacy and take measures to avert disaster.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जब | जब | while; until |
| लगि | तक | up to; until |
| ग्रसत | निगलते हैं | devour |
| न | नहीं | not |
| तब | तब | then; meanwhile |
| लगि | तक | until; for that time |
| जतनु | उपाय; प्रयत्न | measures; effort |
| करहु | कीजिए | make; undertake |
| तजि | छोड़कर | abandoning |
| टेक | हठ; अड़ियल आग्रह | obstinacy; stubborn insistence |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 36
- स्रोत अभिलेख
- 5.36
- सहायक विषय
- मन्दोदरी-रावण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 747, 747
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।