सुन्दरकाण्ड · दोहा 10 · दोहा/सोरठा
भवन गयउ दसकंधर इहाँ पिसाचिनि बृंद।
भवन गयउ दसकंधर इहाँ पिसाचिनि बृंद।
सीतहि त्रास देखावहि धरहिं रूप बहु मंद।।10।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 5.1 · पुस्तक पृ. 723, 724
भावार्थ और शब्दार्थ
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1भवन गयउ दसकंधर इहाँ पिसाचिनि बृंद।
रावण अपने भवन चला गया; इधर राक्षसियों का समूह रह गया।
English explanation
Ravana went to his palace; here remained the group of demonesses.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भवन | भवन को | to the palace |
| गयउ | गया | went |
| दसकंधर | दशमुख रावण | ten-headed Ravana |
| इहाँ | यहाँ, इधर | here, meanwhile |
| पिसाचिनि | राक्षसियों का | of demonesses |
| बृंद | समूह | group |
2 सीतहि त्रास देखावहि धरहिं रूप बहु मंद।।10।।
राक्षसियाँ अनेक अत्यंत विकराल रूप धारण करके सीता को भय दिखाने लगीं।
English explanation
The demonesses assumed many hideous forms and frightened Sita.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सीतहि | सीता को | Sita |
| त्रास | भय | terror |
| देखावहि | दिखाती हैं | show |
| धरहिं | धारण करती हैं | assume |
| रूप | रूप | forms |
| बहु | बहुत | very |
| मंद | विकराल और भयानक | hideous and dreadful |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 10
- स्रोत अभिलेख
- 5.1
- सहायक विषय
- हनुमान्जीका अशोकवाटिकामें सीताको देखकर दु:खी होना और रावणका सीताजीको भय दिखलाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 723, 724
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