सुन्दरकाण्ड · दोहा 11 · दोहा/सोरठा
जहँ तहँ गईं सकल तब सीता कर मन सोच।
जहँ तहँ गईं सकल तब सीता कर मन सोच।
मास दिवस बीतें मोहि मारिहि निसिचर पोच।।11।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 5.11 · पुस्तक पृ. 724, 724
भावार्थ और शब्दार्थ
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1जहँ तहँ गईं सकल तब सीता कर मन सोच।
सब राक्षसियाँ इधर-उधर चली गईं। तब सीता के मन में चिंता हुई।
English explanation
All the demonesses went here and there. Then anxiety arose in Sita’s mind.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जहँ | जहाँ | where |
| तहँ | तहाँ; वहाँ | there |
| गईं | चली गईं | went away |
| सकल | सब राक्षसियाँ | all the demonesses |
| तब | तब | then |
| सीता | सीता | Sita |
| कर | का; के | of; belonging to |
| मन | मन में | in the mind |
| सोच | चिंता | anxiety |
2 मास दिवस बीतें मोहि मारिहि निसिचर पोच।।11।।
सीता सोचती हैं: एक महीने की अवधि बीत जाने पर वह नीच राक्षस मुझे मार डालेगा।
English explanation
Sita thinks: Once the allotted month has passed, that vile demon will kill me.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मास | एक महीने के | of one month |
| दिवस | दिन; अवधि | days; period |
| बीतें | बीत जाने पर | once elapsed |
| मोहि | मुझे | me |
| मारिहि | मार डालेगा | will kill |
| निसिचर | राक्षस रावण | the demon Ravana |
| पोच | नीच; दुष्ट | vile; wicked |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 11
- स्रोत अभिलेख
- 5.11
- सहायक विषय
- श्रीसीता-त्रिजटा-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 724, 724
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