सुन्दरकाण्ड · दोहा 19 · दोहा/सोरठा
ब्रह्म अस्त्र तेहिं साँधा कपि मन कीन्ह बिचार।
ब्रह्म अस्त्र तेहिं साँधा कपि मन कीन्ह बिचार।
जौं न ब्रह्मसर मानउँ महिमा मिटइ अपार।।19।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 5.19 · पुस्तक पृ. 731, 732
भावार्थ और शब्दार्थ
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1ब्रह्म अस्त्र तेहिं साँधा कपि मन कीन्ह बिचार।
मेघनाद ने ब्रह्मास्त्र का संधान किया। हनुमान ने मन में विचार किया।
English explanation
Meghanada aimed the weapon of Brahma. Hanuman reflected within his mind.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ब्रह्म | ब्रह्मा का | of Brahma |
| अस्त्र | अस्त्र | weapon |
| तेहिं | उस मेघनाद ने | he, Meghanada |
| साँधा | संधान किया; निशाना साधा | aimed; readied |
| कपि | हनुमान ने | Hanuman |
| मन | मन में | in his mind |
| कीन्ह | किया | made |
| बिचार | विचार | a reflection |
2 जौं न ब्रह्मसर मानउँ महिमा मिटइ अपार।।19।।
यदि मैं ब्रह्मास्त्र का मान न रखूँ, तो उसकी अपार महिमा मिट जाएगी।
English explanation
If I do not honor Brahma's weapon, its boundless glory will be lost.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जौं | यदि | if |
| न | नहीं | not |
| ब्रह्मसर | ब्रह्मा के बाण अर्थात ब्रह्मास्त्र का | Brahma's arrow, the Brahma weapon |
| मानउँ | मैं मान रखूँ | I honor |
| महिमा | उसकी महिमा | its glory |
| मिटइ | मिट जाएगी | will be lost |
| अपार | अपार; असीम | boundless |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 19
- स्रोत अभिलेख
- 5.19
- सहायक विषय
- हनुमान्जीद्वारा अशोकवाटिका-विध्वंस, अक्षयकुमार-वध और मेघनादका हनुमान्जीको नागपाशमें बाँधकर सभामें ले जाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 731, 732
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