सुन्दरकाण्ड · दोहा 20 · दोहा/सोरठा
कपिहि बिलोकि दसानन बिहसा कहि दुर्बाद।
कपिहि बिलोकि दसानन बिहसा कहि दुर्बाद।
सुत बध सुरति कीन्हि पुनि उपजा हृदयँ बिषाद।।20।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 5.2 · पुस्तक पृ. 732, 733
भावार्थ और शब्दार्थ
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1कपिहि बिलोकि दसानन बिहसा कहि दुर्बाद।
हनुमान को देखकर रावण दुर्वचन कहते हुए हँसा।
English explanation
Seeing Hanuman, Ravana laughed while uttering insulting words.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कपिहि | हनुमान को | Hanuman; object of seeing |
| बिलोकि | देखकर | on seeing |
| दसानन | दस मुखों वाला रावण | ten-headed Ravana |
| बिहसा | हँसा | laughed |
| कहि | कहकर; कहते हुए | uttering |
| दुर्बाद | अपमानजनक वचन | insulting words |
2 सुत बध सुरति कीन्हि पुनि उपजा हृदयँ बिषाद।।20।।
फिर उसने अपने पुत्र के वध को याद किया और उसके हृदय में शोक उत्पन्न हो गया।
English explanation
Then he remembered his son’s killing, and sorrow arose in his heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुत | पुत्र अक्षयकुमार का | of his son Akshayakumara |
| बध | वध | killing |
| सुरति | स्मरण | remembrance |
| कीन्हि | किया | made; recalled |
| पुनि | फिर | then; again |
| उपजा | उत्पन्न हुआ | arose |
| हृदयँ | हृदय में | in his heart |
| बिषाद | शोक; दुःख | sorrow; grief |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 20
- स्रोत अभिलेख
- 5.2
- सहायक विषय
- हनुमान्जीद्वारा अशोकवाटिका-विध्वंस, अक्षयकुमार-वध और मेघनादका हनुमान्जीको नागपाशमें बाँधकर सभामें ले जाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 732, 733
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