सुन्दरकाण्ड · दोहा 21 · दोहा/सोरठा
जाके बल लवलेस तें जितेहु चराचर झारि।
जाके बल लवलेस तें जितेहु चराचर झारि।
तासु दूत मैं जा करि हरि आनेहु प्रिय नारि।।21।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 5.21 · पुस्तक पृ. 733, 734
भावार्थ और शब्दार्थ
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1जाके बल लवलेस तें जितेहु चराचर झारि।
जिसके बल के अत्यल्प अंश से तुमने समस्त चर-अचर जगत को जीत लिया—
English explanation
By a mere tiny fraction of whose power you conquered the entire moving and unmoving world—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जाके | जिसके | whose |
| बल | बल के | of the power |
| लवलेस | अत्यल्प अंश | a minute fraction |
| तें | से | by |
| जितेहु | तुमने जीत लिया | you conquered |
| चराचर | चल और अचल जगत | the moving and unmoving world |
| झारि | समूचा; सब | entirely; all of it |
2 तासु दूत मैं जा करि हरि आनेहु प्रिय नारि।।21।।
मैं उन्हीं का दूत हूँ, जिनकी प्रिय पत्नी को तुम हरकर ले आए हो।
English explanation
I am the messenger of that very one whose beloved wife you abducted and brought here.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तासु | उन्हीं का | of that very one |
| दूत | संदेशवाहक | messenger |
| मैं | मैं | I |
| जा | जिनकी | whose |
| करि | की | of |
| हरि | हरकर; अपहरण करके | having abducted |
| आनेहु | तुम ले आए हो | you have brought here |
| प्रिय | प्रिय | beloved |
| नारि | पत्नी; सीता | wife; Sita |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 21
- स्रोत अभिलेख
- 5.21
- सहायक विषय
- हनुमान्-रावण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 733, 734
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