सुन्दरकाण्ड · दोहा 22 · दोहा/सोरठा
प्रनतपाल रघुनायक करुना सिंधु खरारि।
प्रनतपाल रघुनायक करुना सिंधु खरारि।
गएँ सरन प्रभु राखिहैं तव अपराध बिसारि।।22।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 5.22 · पुस्तक पृ. 734, 735
भावार्थ और शब्दार्थ
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1प्रनतपाल रघुनायक करुना सिंधु खरारि।
रघुनायक राम शरणागतों के रक्षक, करुणा के सागर और खर के शत्रु हैं।
English explanation
Rama, lord of the Raghu lineage, protects those who seek refuge; he is an ocean of compassion and Khara’s foe.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रनतपाल | शरणागतों के पालक | protector of those seeking refuge |
| रघुनायक | रघुकुल के नायक राम | Rama, lord of the Raghu lineage |
| करुना | करुणा का | of compassion |
| सिंधु | सागर | ocean |
| खरारि | राक्षस खर के शत्रु राम | Rama, foe of the demon Khara |
2 गएँ सरन प्रभु राखिहैं तव अपराध बिसारि।।22।।
उनकी शरण में जाने पर प्रभु तुम्हारे अपराध भुलाकर तुम्हारी रक्षा करेंगे।
English explanation
If you seek his refuge, the Lord will protect you, setting aside your offenses.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गएँ | जाने पर | upon going |
| सरन | शरण में | for refuge |
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| राखिहैं | रक्षा करेंगे | will protect you |
| तव | तुम्हारे | your |
| अपराध | अपराध | offenses |
| बिसारि | भुलाकर | setting aside |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 22
- स्रोत अभिलेख
- 5.22
- सहायक विषय
- हनुमान्-रावण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 734, 735
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