सुन्दरकाण्ड · दोहा 18 · दोहा/सोरठा
कछु मारेसि कछु मर्देसि कछु मिलएसि धरि धूरि।
कछु मारेसि कछु मर्देसि कछु मिलएसि धरि धूरि।
कछु पुनि जाइ पुकारे प्रभु मर्कट बल भूरि।।18।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 5.18 · पुस्तक पृ. 730, 731
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1कछु मारेसि कछु मर्देसि कछु मिलएसि धरि धूरि।
हनुमान ने कुछ को मारा, कुछ को कुचला और कुछ को पकड़कर धूल में मिला दिया।
English explanation
Hanuman killed some, crushed others, and seized still others and ground them into the dust.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कछु | कुछ को | some |
| मारेसि | उन्होंने मारा | he killed |
| कछु | कुछ को | others |
| मर्देसि | उन्होंने कुचला | he crushed |
| कछु | कुछ को | still others |
| मिलएसि | उन्होंने मिला दिया | he ground into |
| धरि | पकड़कर | having seized |
| धूरि | धूल में | the dust |
2 कछु पुनि जाइ पुकारे प्रभु मर्कट बल भूरि।।18।।
कुछ ने फिर जाकर पुकारा, ‘हे स्वामी, इस वानर का बल बहुत अधिक है।’
English explanation
Some went back and cried, ‘Lord, this monkey’s strength is immense.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कछु | कुछ | some |
| पुनि | फिर | again |
| जाइ | जाकर | having gone |
| पुकारे | पुकारा | cried out |
| प्रभु | हे स्वामी | O lord |
| मर्कट | वानर का | the monkey’s |
| बल | बल | strength |
| भूरि | बहुत अधिक | immense |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 18
- स्रोत अभिलेख
- 5.18
- सहायक विषय
- हनुमान्जीद्वारा अशोकवाटिका-विध्वंस, अक्षयकुमार-वध और मेघनादका हनुमान्जीको नागपाशमें बाँधकर सभामें ले जाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 730, 731
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