सुन्दरकाण्ड · दोहा 17 · दोहा/सोरठा
देखि बुद्धि बल निपुन कपि कहेउ जानकीं जाहु।
मूल पाठ
देखि बुद्धि बल निपुन कपि कहेउ जानकीं जाहु।
रघुपति चरन हृदयँ धरि तात मधुर फल खाहु।।17।।
स्रोत अभिलेख 5.17 · पुस्तक पृ. 730, 730
भावार्थ
मूल पाठ के बादहनुमान्जीको बुद्धि और बलमें निपुण देखकर जानकीजीने कहा—जाओ। हे तात! श्रीरघुनाथजीके चरणोंको हृदयमें धारण करके मीठे फल खाओ॥ १७॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 730 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1देखि बुद्धि बल निपुन कपि कहेउ जानकीं जाहु।
English explanation
Seeing Hanuman’s proficiency in intelligence and strength, Janaki said, “Go.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखि | देखकर | seeing |
| बुद्धि | बुद्धि में | in intelligence |
| बल | बल में | in strength |
| निपुन | निपुण | proficient |
| कपि | वानर हनुमान को | Hanuman, the monkey |
| कहेउ | कहा | said |
| जानकीं | जानकी सीता ने | Janaki, Sita, said |
| जाहु | जाओ | go |
2 रघुपति चरन हृदयँ धरि तात मधुर फल खाहु।।17।।
English explanation
“Dear son, hold Rama’s feet in your heart and eat the sweet fruit.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रघुपति | रघुवंश के स्वामी राम के | of Rama, lord of the Raghu line |
| चरन | चरण | feet |
| हृदयँ | हृदय में | in your heart |
| धरि | धारण करके | holding |
| तात | हे पुत्र | dear son |
| मधुर | मीठे | sweet |
| फल | फल | fruit |
| खाहु | खाओ | eat |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 17
- स्रोत अभिलेख
- 5.17
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 730
- सहायक विषय
- हनुमान्जीद्वारा अशोकवाटिका-विध्वंस, अक्षयकुमार-वध और मेघनादका हनुमान्जीको नागपाशमें बाँधकर सभामें ले जाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 730, 730
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।