सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तिन्ह कर भय माता मोहि नाहीं। जौं तुम्ह सुख मानहु मन माहीं।।
मूल पाठ
तिन्ह कर भय माता मोहि नाहीं। जौं तुम्ह सुख मानहु मन माहीं।।
स्रोत अभिलेख 5.17 · पुस्तक पृ. 730, 730
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[हनुमान्जीने कहा—] हे माता! यदि आप मनमें सुख मानें (प्रसन्न होकर आज्ञा दें) तो मुझे उनका भय तो बिलकुल नहीं है॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 730 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 तिन्ह कर भय माता मोहि नाहीं। जौं तुम्ह सुख मानहु मन माहीं।।
English explanation
“Mother, I have no fear of them, provided you are pleased in your heart to let me go.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तिन्ह | उनका | of those demons |
| कर | का | of |
| भय | भय | fear |
| माता | हे माता | O mother |
| मोहि | मुझे | to me |
| नाहीं | नहीं है | there is none |
| जौं | यदि | if |
| तुम्ह | आप | you |
| सुख | प्रसन्नता | pleasure |
| मानहु | मानें | feel |
| मन | मन | your heart |
| माहीं | में | within |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.17
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 730
- सहायक विषय
- हनुमान्जीद्वारा अशोकवाटिका-विध्वंस, अक्षयकुमार-वध और मेघनादका हनुमान्जीको नागपाशमें बाँधकर सभामें ले जाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 730, 730
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।