सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
चलेउ नाइ सिरु पैठेउ बागा। फल खाएसि तरु तोरैं लागा।।
मूल पाठ
चलेउ नाइ सिरु पैठेउ बागा। फल खाएसि तरु तोरैं लागा।।
रहे तहाँ बहु भट रखवारे। कछु मारेसि कछु जाइ पुकारे।।
स्रोत अभिलेख 5.18 · पुस्तक पृ. 730, 731
भावार्थ
मूल पाठ के बादवे सीताजीको सिर नवाकर चले और बागमें घुस गये। फल खाये और वृक्षोंको तोडऩे लगे। वहाँ बहुत-से योद्धा रखवाले थे। उनमेंसे कुछको मार डाला और कुछने जाकर रावणसे पुकार की—॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 730 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 चलेउ नाइ सिरु पैठेउ बागा। फल खाएसि तरु तोरैं लागा।।
English explanation
Hanuman bowed his head, departed, and entered the grove. He ate fruit and began breaking trees.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चलेउ | चले | departed |
| नाइ | झुकाकर | having bowed |
| सिरु | सिर | his head |
| पैठेउ | प्रवेश किया | entered |
| बागा | बाग में | into the grove |
| फल | फल | fruit |
| खाएसि | उन्होंने खाए | he ate |
| तरु | पेड़ | trees |
| तोरैं | तोड़ने | to break |
| लागा | लगे | began |
2 रहे तहाँ बहु भट रखवारे। कछु मारेसि कछु जाइ पुकारे।।
English explanation
Many warriors were guarding the grove. Hanuman struck down some, while others went and raised the alarm.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रहे | थे | were stationed |
| तहाँ | वहाँ | there |
| बहु | बहुत-से | many |
| भट | योद्धा | warriors |
| रखवारे | रखवाली करने वाले | guards |
| कछु | कुछ को | some of them |
| मारेसि | उन्होंने मारा | he struck down |
| कछु | कुछ | others |
| जाइ | जाकर | having gone |
| पुकारे | पुकारने लगे | raised the alarm |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.18
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 730
- सहायक विषय
- हनुमान्जीद्वारा अशोकवाटिका-विध्वंस, अक्षयकुमार-वध और मेघनादका हनुमान्जीको नागपाशमें बाँधकर सभामें ले जाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 730, 731
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।