सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नाथ एक आवा कपि भारी। तेहिं असोक बाटिका उजारी।।
मूल पाठ
नाथ एक आवा कपि भारी। तेहिं असोक बाटिका उजारी।।
खाएसि फल अरु बिटप उपारे। रच्छक मर्दि मर्दि महि डारे।।
स्रोत अभिलेख 5.18 · पुस्तक पृ. 730, 731
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[और कहा—] हे नाथ! एक बड़ा भारी बंदर आया है। उसने अशोकवाटिका उजाड़ डाली। फल खाये, वृक्षोंको उखाड़ डाला और रखवालोंको मसल-मसलकर जमीनपर डाल दिया॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 731 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 नाथ एक आवा कपि भारी। तेहिं असोक बाटिका उजारी।।
English explanation
Lord, a mighty monkey has arrived. He has laid waste to the Ashoka grove.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नाथ | हे स्वामी | O lord |
| एक | एक | a |
| आवा | आया है | has arrived |
| कपि | वानर | monkey |
| भारी | बड़ा बलवान | mighty |
| तेहिं | उसने | he |
| असोक | अशोक नाम की | Ashoka |
| बाटिका | वाटिका | grove |
| उजारी | उजाड़ दी | laid waste to |
2 खाएसि फल अरु बिटप उपारे। रच्छक मर्दि मर्दि महि डारे।।
English explanation
He ate the fruit and uprooted trees. He crushed the guards and cast them to the ground.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| खाएसि | उसने खाए | he ate |
| फल | फल | fruit |
| अरु | और | and |
| बिटप | पेड़ | trees |
| उपारे | उखाड़ दिए | uprooted |
| रच्छक | रक्षकों को | the guards |
| मर्दि | कुचलकर | crushing |
| मर्दि | बार-बार कुचलकर | crushing repeatedly |
| महि | धरती पर | onto the ground |
| डारे | पटक दिया | cast down |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.18
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 731
- सहायक विषय
- हनुमान्जीद्वारा अशोकवाटिका-विध्वंस, अक्षयकुमार-वध और मेघनादका हनुमान्जीको नागपाशमें बाँधकर सभामें ले जाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 730, 731
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।