सुन्दरकाण्ड · दोहा 26 · दोहा/सोरठा
पूँछ बुझाइ खोइ श्रम धरि लघु रूप बहोरि।
पूँछ बुझाइ खोइ श्रम धरि लघु रूप बहोरि।
जनकसुता के आगें ठाढ़ भयउ कर जोरि।।26।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 5.26 · पुस्तक पृ. 737, 738
भावार्थ और शब्दार्थ
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1पूँछ बुझाइ खोइ श्रम धरि लघु रूप बहोरि।
पूँछ की आग बुझाकर, थकान दूर करके और फिर छोटा रूप धारण करके,
English explanation
After extinguishing the fire on his tail, relieving his fatigue, and assuming a small form again,
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पूँछ | पूँछ की आग | the fire on his tail |
| बुझाइ | बुझाकर | having extinguished |
| खोइ | दूर करके | having dispelled |
| श्रम | थकान | fatigue |
| धरि | धारण करके | having assumed |
| लघु | छोटा | small |
| रूप | रूप | form |
| बहोरि | फिर | again |
2 जनकसुता के आगें ठाढ़ भयउ कर जोरि।।26।।
हनुमान जनक की पुत्री सीता के सामने हाथ जोड़कर खड़े हो गए।
English explanation
Hanuman stood before Sita, Janaka’s daughter, with his hands joined.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जनकसुता | जनक की पुत्री सीता | Sita, daughter of Janaka |
| के | के | of |
| आगें | सामने | in front |
| ठाढ़ | खड़े | standing |
| भयउ | हो गए | became |
| कर | हाथ | hands |
| जोरि | जोड़कर | having joined |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 26
- स्रोत अभिलेख
- 5.26
- सहायक विषय
- लङ्का-दहन
- मुद्रित पृष्ठ
- 737, 738
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