सुन्दरकाण्ड · दोहा 25 · दोहा/सोरठा
हरि प्रेरित तेहि अवसर चले मरुत उनचास।
हरि प्रेरित तेहि अवसर चले मरुत उनचास।
अट्टहास करि गर्ज़ा कपि बढ़ि लाग अकास।।25।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 5.25 · पुस्तक पृ. 737, 737
भावार्थ और शब्दार्थ
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1हरि प्रेरित तेहि अवसर चले मरुत उनचास।
भगवान की प्रेरणा से उस समय उनचास पवन चलने लगे।
English explanation
Prompted by the Lord, the forty-nine winds began to blow at that moment.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हरि | भगवान द्वारा | by the Lord |
| प्रेरित | प्रेरित | prompted |
| तेहि | उस | that |
| अवसर | समय | moment |
| चले | बहने लगे | began to blow |
| मरुत | पवन | winds |
| उनचास | उनचास | forty-nine |
2 अट्टहास करि गर्ज़ा कपि बढ़ि लाग अकास।।25।।
हनुमान अट्टहास करके गर्जे और आकार बढ़ाकर आकाश तक पहुँच गए।
English explanation
Hanuman roared with loud laughter and, enlarging himself, reached the sky.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अट्टहास | ज़ोर का ठहाका | loud, resounding laughter |
| करि | करके | having made |
| गर्ज़ा | गर्जे | roared |
| कपि | हनुमान | Hanuman |
| बढ़ि | आकार बढ़ाकर | enlarging himself |
| लाग | पहुँच गए, छूने लगे | reached; touched |
| अकास | आकाश | the sky |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 25
- स्रोत अभिलेख
- 5.25
- सहायक विषय
- लङ्का-दहन
- मुद्रित पृष्ठ
- 737, 737
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