सुन्दरकाण्ड · दोहा 27 · दोहा/सोरठा
जनकसुतहि समुझाइ करि बहु बिधि धीरजु दीन्ह।
जनकसुतहि समुझाइ करि बहु बिधि धीरजु दीन्ह।
चरन कमल सिरु नाइ कपि गवनु राम पहिं कीन्ह।।27।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 5.27 · पुस्तक पृ. 738, 739
भावार्थ और शब्दार्थ
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1जनकसुतहि समुझाइ करि बहु बिधि धीरजु दीन्ह।
हनुमान ने जनकपुत्री सीता को समझाकर अनेक प्रकार से धीरज दिया।
English explanation
Hanuman reassured Sita, Janaka’s daughter, and comforted her in many ways.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जनकसुतहि | जनक की पुत्री सीता को | to Sita, daughter of Janaka |
| समुझाइ | समझाकर; आश्वस्त करके | having reassured |
| करि | करके | having done so |
| बहु | अनेक | many |
| बिधि | तरह से | in ways |
| धीरजु | धैर्य; सांत्वना | courage; consolation |
| दीन्ह | दिया | gave |
2 चरन कमल सिरु नाइ कपि गवनु राम पहिं कीन्ह।।27।।
सीता के कमल-समान चरणों में सिर झुकाकर हनुमान ने श्रीराम की ओर प्रस्थान किया।
English explanation
Bowing his head at Sita’s lotus-like feet, Hanuman departed toward Rama.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चरन | सीता के चरणों में | at Sita’s feet |
| कमल | कमल-समान | lotus-like |
| सिरु | सिर | head |
| नाइ | झुकाकर | having bowed |
| कपि | वानर हनुमान ने | Hanuman, the monkey |
| गवनु | प्रस्थान | departure |
| राम | श्रीराम | Rama |
| पहिं | की ओर; के पास | toward; to |
| कीन्ह | किया | made; undertook |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 27
- स्रोत अभिलेख
- 5.27
- सहायक विषय
- लङ्का जलानेके बाद हनुमान्जीका सीताजीसे विदा माँगना और चूड़ामणि पाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 738, 739
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