सुन्दरकाण्ड · दोहा 30 · दोहा/सोरठा
नाम पाहरु दिवस निसि ध्यान तुम्हार कपाट।
नाम पाहरु दिवस निसि ध्यान तुम्हार कपाट।
लोचन निज पद जंत्रित जाहिं प्रान केहिं बाट।।30।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 5.3 · पुस्तक पृ. 741, 741
भावार्थ और शब्दार्थ
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1नाम पाहरु दिवस निसि ध्यान तुम्हार कपाट।
आपका नाम दिन-रात पहरेदार है और आपका ध्यान किवाड़ है।
English explanation
Your name stands guard day and night, and meditation on you forms the door.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नाम | आपका नाम | your name |
| पाहरु | पहरेदार | guard |
| दिवस | दिन | day |
| निसि | रात | night |
| ध्यान | ध्यान, स्मरण | meditation |
| तुम्हार | आपका, आप पर | on you |
| कपाट | किवाड़ | door |
2 लोचन निज पद जंत्रित जाहिं प्रान केहिं बाट।।30।।
उनकी आँखें अपने चरणों पर जड़ी हुई हैं; ऐसे में प्राण किस रास्ते से निकलें?
English explanation
Her eyes are fixed on her own feet; by what path, then, could her life-breath escape?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लोचन | आँखें | eyes |
| निज | अपने | her own |
| पद | चरणों पर | on her feet |
| जंत्रित | स्थिर, जड़ी हुई | fixed, held fast |
| जाहिं | जाएँ, निकलें | could depart |
| प्रान | प्राण | life-breath |
| केहिं | किस | which |
| बाट | रास्ते से | by what path |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 30
- स्रोत अभिलेख
- 5.3
- सहायक विषय
- समुद्रके इस पार आना, सबका लौटना, मधुवन-प्रवेश, सुग्रीव-मिलन, श्रीराम-हनुमान्-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 741, 741
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।