सुन्दरकाण्ड · दोहा 31 · दोहा/सोरठा
निमिष निमिष करुनानिधि जाहिं कलप सम बीति।
निमिष निमिष करुनानिधि जाहिं कलप सम बीति।
बेगि चलिय प्रभु आनिअ भुज बल खल दल जीति।।31।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 5.31 · पुस्तक पृ. 741, 742
भावार्थ और शब्दार्थ
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1निमिष निमिष करुनानिधि जाहिं कलप सम बीति।
हे करुणानिधान, सीता का एक-एक क्षण कल्प के समान बीत रहा है।
English explanation
O treasure of compassion, each moment passes for Sita like an aeon.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निमिष | क्षण | moment |
| निमिष | क्षण; एक-एक | moment; each successive one |
| करुनानिधि | हे करुणा के भंडार राम | O Rama, treasure of compassion |
| जाहिं | जाते हैं | pass |
| कलप | कल्प, अत्यंत लंबा काल | an aeon, an immensely long age |
| सम | के समान | like |
| बीति | बीतकर | elapsing |
2 बेगि चलिय प्रभु आनिअ भुज बल खल दल जीति।।31।।
हे प्रभु, शीघ्र चलिए और अपने भुजबल से दुष्टों की सेना को जीतकर सीता को ले आइए।
English explanation
Lord, depart swiftly and bring Sita back after defeating the wicked army with the strength of your arms.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बेगि | शीघ्र | swiftly |
| चलिय | चलिए | please go |
| प्रभु | हे स्वामी राम | O Lord Rama |
| आनिअ | सीता को ले आइए | bring Sita back |
| भुज | भुजाओं के | of your arms |
| बल | बल से | with the strength |
| खल | दुष्टों की | of the wicked |
| दल | सेना | army |
| जीति | जीतकर | having defeated |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 31
- स्रोत अभिलेख
- 5.31
- सहायक विषय
- समुद्रके इस पार आना, सबका लौटना, मधुवन-प्रवेश, सुग्रीव-मिलन, श्रीराम-हनुमान्-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 741, 742
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