सुन्दरकाण्ड · दोहा 32 · दोहा/सोरठा
सुनि प्रभु बचन बिलोकि मुख गात हरषि हनुमंत।
सुनि प्रभु बचन बिलोकि मुख गात हरषि हनुमंत।
चरन परेउ प्रेमाकुल त्राहि त्राहि भगवंत।।32।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 5.32 · पुस्तक पृ. 742, 743
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1सुनि प्रभु बचन बिलोकि मुख गात हरषि हनुमंत।
प्रभु के वचन सुनकर और उनका मुख तथा शरीर देखकर हनुमान हर्षित हुए।
English explanation
Hearing the Lord’s words and beholding his face and body, Hanuman rejoiced.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| प्रभु | प्रभु राम के | of Lord Rama |
| बचन | वचन | words |
| बिलोकि | देखकर | having beheld |
| मुख | मुख | face |
| गात | शरीर | body |
| हरषि | हर्षित होकर | rejoicing |
| हनुमंत | हनुमान | Hanuman |
2 चरन परेउ प्रेमाकुल त्राहि त्राहि भगवंत।।32।।
प्रेम से अभिभूत हनुमान प्रभु के चरणों में गिर पड़े और बोले, ‘हे भगवंत, रक्षा कीजिए, रक्षा कीजिए!’
English explanation
Overwhelmed with love, Hanuman fell at the Lord’s feet, crying, “O Lord, protect me, protect me!”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चरन | चरणों में | at the feet |
| परेउ | गिर पड़े | fell down |
| प्रेमाकुल | प्रेम से अभिभूत | overwhelmed with love |
| त्राहि | रक्षा कीजिए | protect me |
| त्राहि | रक्षा कीजिए | protect me |
| भगवंत | हे भगवान; हे प्रभु राम | O Lord Rama |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 32
- स्रोत अभिलेख
- 5.32
- सहायक विषय
- समुद्रके इस पार आना, सबका लौटना, मधुवन-प्रवेश, सुग्रीव-मिलन, श्रीराम-हनुमान्-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 742, 743
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।