सुन्दरकाण्ड · छंद · छंद
निज भवन गवनेउ सिंधु श्रीरघुपतिहि यह मत भायऊ।
मूल पाठ
निज भवन गवनेउ सिंधु श्रीरघुपतिहि यह मत भायऊ।
यह चरित कलि मलहर जथामति दास तुलसी गायऊ।।
सुख भवन संसय समन दवन बिषाद रघुपति गुन गना।।
तजि सकल आस भरोस गावहि सुनहि संतत सठ मना।।
स्रोत अभिलेख 5.6 · पुस्तक पृ. 768, 769
भावार्थ
मूल पाठ के बादसमुद्र अपने घर चला गया, श्रीरघुनाथजीको यह मत (उसकी सलाह) अच्छा लगा। यह चरित्र कलियुगके पापोंको हरनेवाला है, इसे तुलसीदासने अपनी बुद्धिके अनुसार गाया है। श्रीरघुनाथजीके गुणसमूह सुखके धाम, सन्देहका नाश करनेवाले और विषादका दमन करनेवाले हैं। अरे मूर्ख मन! तू संसारका सब आशा-भरोसा त्यागकर निरन्तर इन्हें गा और सुन।
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 768 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1निज भवन गवनेउ सिंधु श्रीरघुपतिहि यह मत भायऊ।
English explanation
The ocean returned to his own abode; this proposal pleased Lord Rama, lord of Raghu’s line.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निज | अपने | his own |
| भवन | निवास को | to the abode |
| गवनेउ | चला गया | went |
| सिंधु | समुद्र | the ocean |
| श्रीरघुपतिहि | श्रीराम को, रघुकुल के स्वामी को | to Lord Rama, lord of Raghu’s line |
| यह | यह | this |
| मत | सुझाव | proposal |
| भायऊ | अच्छा लगा | was pleasing |
2 यह चरित कलि मलहर जथामति दास तुलसी गायऊ।।
English explanation
The servant Tulsi sang this account, which removes the impurity of the Kali age, to the best of his understanding.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| यह | यह | this |
| चरित | चरित | account |
| कलि | कलियुग का | of the Kali age |
| मलहर | मल दूर करने वाला | removing impurity |
| जथामति | अपनी बुद्धि के अनुसार | to the best of his understanding |
| दास | सेवक | servant |
| तुलसी | तुलसीदास ने | Tulsidas |
| गायऊ | गाया | sang |
3 सुख भवन संसय समन दवन बिषाद रघुपति गुन गना।।
English explanation
The multitude of Lord Rama’s virtues is an abode of happiness, calming doubt and dispelling sorrow.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुख | सुख का | of happiness |
| भवन | धाम | abode |
| संसय | संशय को | doubt |
| समन | शांत करने वाला | calming |
| दवन | मिटाने वाला | dispelling |
| बिषाद | विषाद को | sorrow |
| रघुपति | रघुकुल के स्वामी राम के | of Rama, lord of Raghu’s line |
| गुन | गुणों का | of virtues |
| गना | समूह | multitude |
4 तजि सकल आस भरोस गावहि सुनहि संतत सठ मना।।
English explanation
O foolish mind, abandon all hopes and dependencies, and continually sing and hear Rama’s virtues.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तजि | छोड़कर | abandoning |
| सकल | सब | all |
| आस | आशाएँ | hopes |
| भरोस | भरोसे | dependencies |
| गावहि | गाओ | sing |
| सुनहि | सुनो | listen |
| संतत | निरंतर | continually |
| सठ | हे मूर्ख | O foolish |
| मना | मन | mind |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 5.6
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 768
- सहायक विषय
- समुद्रपर श्रीरामजीका क्रोध और समुद्रकी विनती · श्रीराम-गुणगानकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 768, 769
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।