सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
देखि राम बल पौरुष भारी। हरषि पयोनिधि भयउ सुखारी।।
मूल पाठ
देखि राम बल पौरुष भारी। हरषि पयोनिधि भयउ सुखारी।।
सकल चरित कहि प्रभुहि सुनावा। चरन बंदि पाथोधि सिधावा।।
स्रोत अभिलेख 5.6 · पुस्तक पृ. 768, 769
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रीरामजीका भारी बल और पौरुष देखकर समुद्र हॢषत होकर सुखी हो गया। उसने उन दुष्टोंका सारा चरित्र प्रभुको कह सुनाया। फिर चरणोंकी वन्दना करके समुद्र चला गया॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 768 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 देखि राम बल पौरुष भारी। हरषि पयोनिधि भयउ सुखारी।।
English explanation
Seeing Rama’s great strength and valor, the ocean rejoiced and became happy.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखि | देखकर | having seen |
| राम | राम का | Rama’s |
| बल | बल | strength |
| पौरुष | पराक्रम | valor |
| भारी | महान | great |
| हरषि | हर्षित होकर | rejoicing |
| पयोनिधि | समुद्र | the ocean |
| भयउ | हो गया | became |
| सुखारी | सुखी | happy |
2 सकल चरित कहि प्रभुहि सुनावा। चरन बंदि पाथोधि सिधावा।।
English explanation
The ocean related the entire account to the Lord and departed after bowing at his feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सकल | समस्त | entire |
| चरित | वृत्तांत | account |
| कहि | कहकर | having related |
| प्रभुहि | प्रभु राम को | to Lord Rama |
| सुनावा | सुनाया | told |
| चरन | चरणों की | at the feet |
| बंदि | वंदना करके | having bowed |
| पाथोधि | समुद्र | the ocean |
| सिधावा | चला गया | departed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.6
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 768
- सहायक विषय
- समुद्रपर श्रीरामजीका क्रोध और समुद्रकी विनती · श्रीराम-गुणगानकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 768, 769
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।