सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
एहि सर मम उत्तर तट बासी। हतहु नाथ खल नर अघ रासी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दइस बाणसे मेरे उत्तर तटपर रहनेवाले पापके राशि दुष्ट मनुष्योंका वध कीजिये। कृपालु और रणधीर श्रीरामजीने समुद्रके मनकी पीड़ा सुनकर उसे तुरंत ही हर लिया (अर्थात् बाणसे उन दुष्टोंका वध कर दिया)॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 768 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
एहि सर मम उत्तर तट बासी। हतहु नाथ खल नर अघ रासी।।
सुनि कृपाल सागर मन पीरा। तुरतहिं हरी राम रनधीरा।।
स्रोत अभिलेख 5.6 · पुस्तक पृ. 768, 769
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 एहि सर मम उत्तर तट बासी। हतहु नाथ खल नर अघ रासी।।
English explanation
Lord, with this arrow slay the wicked men dwelling on my northern shore, who are heaps of sin.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एहि | इस | this |
| सर | बाण से | with the arrow |
| मम | मेरे | my |
| उत्तर | उत्तरी | northern |
| तट | किनारे पर | on the shore |
| बासी | रहने वाले | dwelling |
| हतहु | मारिए | slay |
| नाथ | हे स्वामी | O Lord |
| खल | दुष्ट | wicked |
| नर | मनुष्यों को | the men |
| अघ | पापों के | of sins |
| रासी | ढेर | heaps |
2 सुनि कृपाल सागर मन पीरा। तुरतहिं हरी राम रनधीरा।।
English explanation
Hearing the ocean’s anguish, compassionate Rama, steadfast in battle, immediately removed it.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| कृपाल | कृपालु | compassionate |
| सागर | समुद्र के | the ocean’s |
| मन | मन की | of the heart |
| पीरा | पीड़ा | anguish |
| तुरतहिं | तुरंत ही | immediately |
| हरी | दूर की | removed |
| राम | राम ने | Rama |
| रनधीरा | रण में धीर | steadfast in battle |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.6
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 768
- सहायक विषय
- समुद्रपर श्रीरामजीका क्रोध और समुद्रकी विनती · श्रीराम-गुणगानकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 768, 769
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