सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मैं पुनि उर धरि प्रभुताई। करिहउँ बल अनुमान सहाई।।
मूल पाठ
मैं पुनि उर धरि प्रभुताई। करिहउँ बल अनुमान सहाई।।
एहि बिधि नाथ पयोधि बँधाइअ। जेहिं यह सुजसु लोक तिहुँ गाइअ।।
स्रोत अभिलेख 5.6 · पुस्तक पृ. 768, 769
भावार्थ
मूल पाठ के बादमैं भी प्रभुकी प्रभुताको हृदयमें धारण कर अपने बलके अनुसार (जहाँतक मुझसे बन पड़ेगा) सहायता करूँगा। हे नाथ! इस प्रकार समुद्रको बँधाइये, जिससे तीनों लोकोंमें आपका सुन्दर यश गाया जाय॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 768 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 मैं पुनि उर धरि प्रभुताई। करिहउँ बल अनुमान सहाई।।
English explanation
I too, keeping your sovereignty in my heart, will help according to my assessment of my strength.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मैं | मैं, समुद्र | I, the ocean |
| पुनि | भी | also |
| उर | हृदय में | in the heart |
| धरि | धारण करके | holding |
| प्रभुताई | आपकी प्रभुता | your sovereignty |
| करिहउँ | मैं करूँगा | I will give |
| बल | अपनी शक्ति का | of my strength |
| अनुमान | अनुमान करके | having assessed |
| सहाई | सहायता | assistance |
2 एहि बिधि नाथ पयोधि बँधाइअ। जेहिं यह सुजसु लोक तिहुँ गाइअ।।
English explanation
Lord, have a bridge built across the ocean in this way, so that this noble fame of yours may be sung in all three worlds.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एहि | इस | this |
| बिधि | प्रकार से | in the manner |
| नाथ | हे स्वामी | O Lord |
| पयोधि | समुद्र पर | across the ocean |
| बँधाइअ | सेतु बनवाइए | have a bridge built |
| जेहिं | जिससे | so that |
| यह | यह | this |
| सुजसु | सुंदर यश | noble fame |
| लोक | लोकों में | in the worlds |
| तिहुँ | तीनों | all three |
| गाइअ | गाया जाए | may be sung |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.6
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 768
- सहायक विषय
- समुद्रपर श्रीरामजीका क्रोध और समुद्रकी विनती · श्रीराम-गुणगानकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 768, 769
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।