सुन्दरकाण्ड · छंद · छंद
करि जतन भट कोटिन्ह बिकट तन नगर चहुँ दिसि रच्छहीं।
मूल पाठ
करि जतन भट कोटिन्ह बिकट तन नगर चहुँ दिसि रच्छहीं।
कहुँ महिष मानषु धेनु खर अज खल निसाचर भच्छहीं।।
एहि लागि तुलसीदास इन्ह की कथा कछु एक है कही।
रघुबीर सर तीरथ सरीरन्हि त्यागि गति पैहहिं सही।।
स्रोत अभिलेख 5.3 · पुस्तक पृ. 716, 718
भावार्थ
मूल पाठ के बादभयंकर शरीरवाले करोड़ों योद्धा यत्न करके (बड़ी सावधानीसे) नगरकी चारों दिशाओंमें (सब ओरसे) रखवाली करते हैं। कहीं दुष्ट राक्षस भैंसों, मनुष्यों, गायों, गदहों और बकरोंको खा रहे हैं। तुलसीदासने इनकी कथा इसीलिये कुछ थोड़ी-सी कही है कि ये निश्चय ही श्रीरामचन्द्रजीके बाणरूपी तीर्थमें शरीरोंको त्यागकर परमगति पावेंगे॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 717 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1करि जतन भट कोटिन्ह बिकट तन नगर चहुँ दिसि रच्छहीं।
English explanation
Millions of warriors with fearsome bodies vigilantly guarded the city on all four sides.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करि | करके | making |
| जतन | सावधान प्रयत्न | vigilant effort |
| भट | योद्धा | warriors |
| कोटिन्ह | करोड़ों | tens of millions |
| बिकट | भयानक | fearsome |
| तन | शरीर वाले | bodied |
| नगर | नगर की | the city |
| चहुँ | चारों | all four |
| दिसि | दिशाओं में | directions |
| रच्छहीं | रक्षा करते थे | guarded |
2कहुँ महिष मानषु धेनु खर अज खल निसाचर भच्छहीं।।
English explanation
In some places wicked demons were eating buffaloes, humans, cows, donkeys, and goats.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहुँ | कहीं | in some places |
| महिष | भैंसों को | buffaloes |
| मानषु | मनुष्यों को | humans |
| धेनु | गायों को | cows |
| खर | गधों को | donkeys |
| अज | बकरों को | goats |
| खल | दुष्ट | wicked |
| निसाचर | राक्षस | demons |
| भच्छहीं | खा रहे थे | were devouring |
3एहि लागि तुलसीदास इन्ह की कथा कछु एक है कही।
English explanation
For this reason, Tulsidas has told a little of their story—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एहि | इस | this |
| लागि | कारण से | for this reason |
| तुलसीदास | कवि तुलसीदास ने | the poet Tulsidas |
| इन्ह | इन राक्षसों | these demons |
| की | की | of |
| कथा | कथा | story |
| कछु | कुछ | a little |
| एक | थोड़ी-सी | a small amount |
| है | है | has |
| कही | कही | told |
4रघुबीर सर तीरथ सरीरन्हि त्यागि गति पैहहिं सही।।
English explanation
Giving up their bodies at the sacred crossing formed by Rama’s arrows, they will surely attain a blessed destiny.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रघुबीर | रघुवंश के वीर राम के | of Rama, hero of Raghu’s lineage |
| सर | बाण | arrows |
| तीरथ | रूपी तीर्थ में | as a sacred crossing |
| सरीरन्हि | शरीरों को | their bodies |
| त्यागि | त्यागकर | having relinquished |
| गति | सद्गति | a blessed destiny |
| पैहहिं | पाएँगे | will attain |
| सही | निश्चय ही | surely |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 5.3
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 717
- सहायक विषय
- लङ्कावर्णन, लङ्किनीपर प्रहार, लङ्कामें प्रवेश
- मुद्रित पृष्ठ
- 716, 718
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।