सुन्दरकाण्ड · दोहा 3 · दोहा/सोरठा
पुर रखवारे देखि बहु कपि मन कीन्ह बिचार।
पुर रखवारे देखि बहु कपि मन कीन्ह बिचार।
अति लघु रूप धरौं निसि नगर करौं पइसार।।3।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 5.3 · पुस्तक पृ. 716, 718
भावार्थ और शब्दार्थ
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1पुर रखवारे देखि बहु कपि मन कीन्ह बिचार।
नगर के बहुत से रखवालों को देखकर हनुमान ने मन में विचार किया।
English explanation
Seeing the city’s many guards, Hanuman reflected within himself.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुर | नगर के | of the city |
| रखवारे | रखवालों को | guards |
| देखि | देखकर | seeing |
| बहु | बहुत से | many |
| कपि | हनुमान ने | Hanuman, the monkey hero |
| मन | मन में | in his mind |
| कीन्ह | किया | made |
| बिचार | विचार | a reflection |
2 अति लघु रूप धरौं निसि नगर करौं पइसार।।3।।
मैं अत्यंत छोटा रूप धारण करूँ और रात में नगर में प्रवेश करूँ।
English explanation
Let me assume a very small form and enter the city at night.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अति | अत्यंत | very |
| लघु | छोटा | small |
| रूप | रूप | form |
| धरौं | मैं धारण करूँ | let me assume |
| निसि | रात में | at night |
| नगर | नगर में | into the city |
| करौं | मैं करूँ | let me make |
| पइसार | प्रवेश | entry |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 3
- स्रोत अभिलेख
- 5.3
- सहायक विषय
- लङ्कावर्णन, लङ्किनीपर प्रहार, लङ्कामें प्रवेश
- मुद्रित पृष्ठ
- 716, 718
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