सुन्दरकाण्ड · दोहा 2 · दोहा/सोरठा
राम काजु सबु करिहहु तुम्ह बल बुद्धि निधान।
मूल पाठ
राम काजु सबु करिहहु तुम्ह बल बुद्धि निधान।
आसिष देह गई सो हरषि चलेउ हनुमान।।2।।
स्रोत अभिलेख 5.2 · पुस्तक पृ. 715, 716
भावार्थ
मूल पाठ के बादतुम श्रीरामचन्द्रजीका सब कार्य करोगे, क्योंकि तुम बल-बुद्धिके भण्डार हो। यह आशीर्वाद देकर वह चली गयी, तब हनुमान्जी हर्षित होकर चले॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 716 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1राम काजु सबु करिहहु तुम्ह बल बुद्धि निधान।
English explanation
“You will accomplish all of Rama’s tasks; you are a storehouse of strength and intelligence.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | राम का | Rama’s |
| काजु | कार्य | task |
| सबु | सभी | all |
| करिहहु | तुम करोगे | you will accomplish |
| तुम्ह | तुम | you |
| बल | शक्ति | strength |
| बुद्धि | बुद्धिमत्ता | intelligence |
| निधान | भंडार | storehouse |
2 आसिष देह गई सो हरषि चलेउ हनुमान।।2।।
English explanation
Surasa departed after giving her blessing, and Hanuman joyfully continued on his way.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आसिष | आशीर्वाद | blessing |
| देह | देकर | having given |
| गई | चली गई | departed |
| सो | वह, सुरसा | she, Surasa |
| हरषि | प्रसन्न होकर | joyfully |
| चलेउ | चल पड़े | set off |
| हनुमान | पवनपुत्र हनुमान | Hanuman, son of the wind god |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 2
- स्रोत अभिलेख
- 5.2
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 716
- सहायक विषय
- हनुमान्जीका लङ्काको प्रस्थान, सुरसासे भेंट, छाया पकड़नेवाली राक्षसीका वध
- मुद्रित पृष्ठ
- 715, 716
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।