सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
निसिचरि एक सिंधु महुँ रहई। करि माया नभु के खग गहई।।
मूल पाठ
निसिचरि एक सिंधु महुँ रहई। करि माया नभु के खग गहई।।
जीव जंतु जे गगन उड़ाहीं। जल बिलोकि तिन्ह कै परिछाहीं।।
स्रोत अभिलेख 5.3 · पुस्तक पृ. 716, 718
भावार्थ
मूल पाठ के बादसमुद्रमें एक राक्षसी रहती थी। वह माया करके आकाशमें उड़ते हुए पक्षियोंको पकड़ लेती थी। आकाशमें जो जीव-जन्तु उड़ा करते थे, वह जलमें उनकी परछाईं देखकर॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 716 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 निसिचरि एक सिंधु महुँ रहई। करि माया नभु के खग गहई।।
English explanation
AI draft: A demoness lived in the ocean. Using illusion, she caught birds in the sky.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निसिचरि | राक्षसी | a demoness |
| एक | एक | one |
| सिंधु | समुद्र | the ocean |
| महुँ | में | in |
| रहई | रहती थी | lived |
| करि | करके | employing |
| माया | मायावी शक्ति | illusion |
| नभु | आकाश | the sky |
| के | के | of |
| खग | पक्षियों को | birds |
| गहई | पकड़ती थी | caught |
2 जीव जंतु जे गगन उड़ाहीं। जल बिलोकि तिन्ह कै परिछाहीं।।
English explanation
Seeing in the water the shadows of creatures that flew in the sky—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जीव | जीव | living beings |
| जंतु | प्राणी | creatures |
| जे | जो | that |
| गगन | आकाश में | in the sky |
| उड़ाहीं | उड़ते थे | flew |
| जल | जल में | in the water |
| बिलोकि | देखकर | having seen |
| तिन्ह | उनकी | those creatures |
| कै | की | of |
| परिछाहीं | परछाइयाँ | shadows |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.3
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 716
- सहायक विषय
- लङ्कावर्णन, लङ्किनीपर प्रहार, लङ्कामें प्रवेश
- मुद्रित पृष्ठ
- 716, 718
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।