सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
गहइ छाहँ सक सो न उड़ाई। एहि बिधि सदा गगनचर खाई।।
मूल पाठ
गहइ छाहँ सक सो न उड़ाई। एहि बिधि सदा गगनचर खाई।।
सोइ छल हनूमान कहँ कीन्हा। तासु कपटु कपि तुरतहिं चीन्हा।।
स्रोत अभिलेख 5.3 · पुस्तक पृ. 716, 718
भावार्थ
मूल पाठ के बादउस परछाईंको पकड़ लेती थी, जिससे वे उड़ नहीं सकते थे [और जलमें गिर पड़ते थे] इस प्रकार वह सदा आकाशमें उडऩेवाले जीवोंको खाया करती थी। उसने वही छल हनुमान्जीसे भी किया। हनुमान्जीने तुरंत ही उसका कपट पहचान लिया॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 716 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 गहइ छाहँ सक सो न उड़ाई। एहि बिधि सदा गगनचर खाई।।
English explanation
She seized the shadow, and that creature could no longer fly. In this way she continually ate sky-going creatures.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गहइ | पकड़ लेती थी | seized |
| छाहँ | परछाईं | the shadow |
| सक | सकता था | could |
| सो | वह प्राणी | that creature |
| न | नहीं | not |
| उड़ाई | उड़ना | fly |
| एहि | इस | this |
| बिधि | रीति से | in this manner |
| सदा | सदा | continually |
| गगनचर | आकाश में उड़ने वाले प्राणियों को | sky-going creatures |
| खाई | खाती थी | ate |
2 सोइ छल हनूमान कहँ कीन्हा। तासु कपटु कपि तुरतहिं चीन्हा।।
English explanation
She used that same trick against Hanuman. He immediately recognized her deceit.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सोइ | वही | that very same |
| छल | छल | trick |
| हनूमान | हनुमान | Hanuman |
| कहँ | पर | against |
| कीन्हा | किया | performed |
| तासु | उसका | her |
| कपटु | कपट | deceit |
| कपि | वानर हनुमान ने | Hanuman, the monkey hero |
| तुरतहिं | तुरंत ही | immediately |
| चीन्हा | पहचान लिया | recognized |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.3
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 716
- सहायक विषय
- लङ्कावर्णन, लङ्किनीपर प्रहार, लङ्कामें प्रवेश
- मुद्रित पृष्ठ
- 716, 718
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