सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
ताहि मारि मारुतसुत बीरा। बारिधि पार गयउ मतिधीरा।।
मूल पाठ
ताहि मारि मारुतसुत बीरा। बारिधि पार गयउ मतिधीरा।।
तहाँ जाइ देखी बन सोभा। गुंजत चंचरीक मधु लोभा।।
स्रोत अभिलेख 5.3 · पुस्तक पृ. 716, 718
भावार्थ
मूल पाठ के बादपवनपुत्र धीरबुद्धि वीर श्रीहनुमान्जी उसको मारकर समुद्रके पार गये। वहाँ जाकर उन्होंने वनकी शोभा देखी। मधु (पुष्परस) के लोभसे भौंरे गुञ्जार कर रहे थे॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 716 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 ताहि मारि मारुतसुत बीरा। बारिधि पार गयउ मतिधीरा।।
English explanation
Having killed her, the valiant, steady-minded son of the wind crossed the ocean.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ताहि | उस राक्षसी को | that demoness |
| मारि | मारकर | having killed |
| मारुतसुत | पवनपुत्र हनुमान | Hanuman, son of the wind |
| बीरा | वीर | valiant |
| बारिधि | समुद्र के | of the ocean |
| पार | पार | across |
| गयउ | गए | went |
| मतिधीरा | स्थिरबुद्धि | steady-minded |
2 तहाँ जाइ देखी बन सोभा। गुंजत चंचरीक मधु लोभा।।
English explanation
Arriving there, he saw the beauty of the forest. Bees hummed, drawn by nectar.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तहाँ | वहाँ | there |
| जाइ | जाकर | having gone |
| देखी | देखी | saw |
| बन | वन की | of the forest |
| सोभा | शोभा | beauty |
| गुंजत | गूँजते हुए | humming |
| चंचरीक | भौंरे | bees |
| मधु | फूलों का रस | nectar |
| लोभा | के लोभ से | drawn by desire for |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.3
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 716
- सहायक विषय
- लङ्कावर्णन, लङ्किनीपर प्रहार, लङ्कामें प्रवेश
- मुद्रित पृष्ठ
- 716, 718
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।