सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नाना तरु फल फूल सुहाए। खग मृग बृंद देखि मन भाए।।
मूल पाठ
नाना तरु फल फूल सुहाए। खग मृग बृंद देखि मन भाए।।
सैल बिसाल देखि एक आगें। ता पर धाइ चढेउ भय त्यागें।।
स्रोत अभिलेख 5.3 · पुस्तक पृ. 716, 718
भावार्थ
मूल पाठ के बादअनेकों प्रकारके वृक्ष फल-फूलसे शोभित हैं। पक्षी और पशुओंके समूहको देखकर तो वे मनमें [बहुत ही] प्रसन्न हुए। सामने एक विशाल पर्वत देखकर हनुमान्जी भय त्यागकर उसपर दौड़कर जा चढ़े॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 716 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 नाना तरु फल फूल सुहाए। खग मृग बृंद देखि मन भाए।।
English explanation
Various trees, fruits, and flowers were lovely. The flocks of birds and herds of animals pleased him when he saw them.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नाना | अनेक प्रकार के | various |
| तरु | वृक्ष | trees |
| फल | फल | fruits |
| फूल | फूल | flowers |
| सुहाए | सुंदर लगे | looked lovely |
| खग | पक्षियों के | of birds |
| मृग | पशुओं के | of animals |
| बृंद | समूह | groups |
| देखि | देखकर | on seeing |
| मन | मन को | to his mind |
| भाए | अच्छे लगे | were pleasing |
2 सैल बिसाल देखि एक आगें। ता पर धाइ चढेउ भय त्यागें।।
English explanation
Seeing a huge mountain ahead, he ran toward it and climbed it without fear.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सैल | पर्वत | mountain |
| बिसाल | विशाल | huge |
| देखि | देखकर | seeing |
| एक | एक | one |
| आगें | आगे | ahead |
| ता | उस | that |
| पर | पर | onto |
| धाइ | दौड़कर | having run |
| चढेउ | चढ़ गए | climbed |
| भय | भय | fear |
| त्यागें | छोड़कर | having cast aside |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.3
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 716
- सहायक विषय
- लङ्कावर्णन, लङ्किनीपर प्रहार, लङ्कामें प्रवेश
- मुद्रित पृष्ठ
- 716, 718
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।