सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
उमा न कछु कपि कै अधिकाई। प्रभु प्रताप जो कालहि खाई।।
मूल पाठ
उमा न कछु कपि कै अधिकाई। प्रभु प्रताप जो कालहि खाई।।
गिरि पर चढि लंका तेहिं देखी। कहि न जाइ अति दुर्ग बिसेषी।।
स्रोत अभिलेख 5.3 · पुस्तक पृ. 716, 718
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[शिवजी कहते हैं—] हे उमा! इसमें वानर हनुमान्की कुछ बड़ाई नहीं है। यह प्रभुका प्रताप है, जो कालको भी खा जाता है। पर्वतपर चढ़कर उन्होंने लङ्का देखी। बहुत ही बड़ा किला है, कुछ कहा नहीं जाता॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 716 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 उमा न कछु कपि कै अधिकाई। प्रभु प्रताप जो कालहि खाई।।
English explanation
Uma, this is no greatness of the monkey himself; it is the Lord’s might, which devours even Death.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उमा | हे उमा, पार्वती | O Uma, Parvati |
| न | नहीं | not |
| कछु | कुछ भी | any |
| कपि | वानर हनुमान | Hanuman, the monkey hero |
| कै | की | of |
| अधिकाई | अपनी बड़ाई | personal greatness |
| प्रभु | प्रभु राम का | of Lord Rama |
| प्रताप | प्रताप | might |
| जो | जो | which |
| कालहि | काल को भी | even Death |
| खाई | खा जाता है | devours |
2 गिरि पर चढि लंका तेहिं देखी। कहि न जाइ अति दुर्ग बिसेषी।।
English explanation
Climbing the mountain, he saw Lanka, an extraordinary fortress beyond description.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गिरि | पर्वत | the mountain |
| पर | पर | onto |
| चढि | चढ़कर | having climbed |
| लंका | लंका नगरी | the city of Lanka |
| तेहिं | उन्होंने, हनुमान ने | he, Hanuman |
| देखी | देखी | saw |
| कहि | वर्णन करना | describe |
| न | नहीं | not |
| जाइ | हो सकता | can be done |
| अति | अत्यंत | exceedingly |
| दुर्ग | दुर्ग | fortress |
| बिसेषी | असाधारण | extraordinary |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.3
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 716
- सहायक विषय
- लङ्कावर्णन, लङ्किनीपर प्रहार, लङ्कामें प्रवेश
- मुद्रित पृष्ठ
- 716, 718
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।