सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अति उतंग जलनिधि चहु पासा। कनक कोट कर परम प्रकासा।।
मूल पाठ
अति उतंग जलनिधि चहु पासा। कनक कोट कर परम प्रकासा।।
स्रोत अभिलेख 5.3 · पुस्तक पृ. 716, 718
भावार्थ
मूल पाठ के बादवह अत्यन्त ऊँचा है, उसके चारों ओर समुद्र है। सोनेके परकोटे (चहारदीवारी) का परम प्रकाश हो रहा है॥ ६॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 717 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 अति उतंग जलनिधि चहु पासा। कनक कोट कर परम प्रकासा।।
English explanation
The fortress rose very high, with the ocean on all sides. Its golden rampart shone brilliantly.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अति | अत्यंत | very |
| उतंग | ऊँचा | lofty |
| जलनिधि | समुद्र | the ocean |
| चहु | चारों | all four |
| पासा | ओर | sides |
| कनक | सोने के | golden |
| कोट | परकोटे | rampart |
| कर | का | of |
| परम | अत्यंत | intense |
| प्रकासा | प्रकाश | radiance |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.3
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 717
- सहायक विषय
- लङ्कावर्णन, लङ्किनीपर प्रहार, लङ्कामें प्रवेश
- मुद्रित पृष्ठ
- 716, 718
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।