सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बदन पइठि पुनि बाहेर आवा। मागा बिदा ताहि सिरु नावा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दऔर वे उसके मुखमें घुसकर [तुरंत] फिर बाहर निकल आये और उसे सिर नवाकर विदा माँगने लगे। [उसने कहा—] मैंने तुम्हारे बुद्धि-बलका भेद पा लिया, जिसके लिये देवताओंने मुझे भेजा था॥ ६॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 716 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
बदन पइठि पुनि बाहेर आवा। मागा बिदा ताहि सिरु नावा।।
मोहि सुरन्ह जेहि लागि पठावा। बुधि बल मरमु तोर मै पावा।।
स्रोत अभिलेख 5.2 · पुस्तक पृ. 715, 716
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 बदन पइठि पुनि बाहेर आवा। मागा बिदा ताहि सिरु नावा।।
English explanation
He entered her mouth and then came out again. He asked leave to depart and bowed his head to Surasa.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बदन | मुख में | into the mouth |
| पइठि | प्रवेश करके | having entered |
| पुनि | फिर | then, again |
| बाहेर | बाहर | outside |
| आवा | आए | came |
| मागा | माँगी | asked for |
| बिदा | जाने की अनुमति | leave to depart |
| ताहि | उसको, सुरसा को | to her, Surasa |
| सिरु | सिर | head |
| नावा | झुकाया | bowed |
2 मोहि सुरन्ह जेहि लागि पठावा। बुधि बल मरमु तोर मै पावा।।
English explanation
Surasa said, “I have understood the true extent of your intelligence and strength, fulfilling the purpose for which the gods sent me.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मोहि | मुझे | me |
| सुरन्ह | देवताओं ने | the gods |
| जेहि | जिस उद्देश्य के | which purpose |
| लागि | लिए | for |
| पठावा | भेजा | sent |
| बुधि | बुद्धि | intelligence |
| बल | शक्ति | strength |
| मरमु | मर्म, वास्तविक सामर्थ्य | true nature and extent |
| तोर | तुम्हारी | your |
| मै | मैंने | I |
| पावा | जान लिया | have understood |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.2
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 716
- सहायक विषय
- हनुमान्जीका लङ्काको प्रस्थान, सुरसासे भेंट, छाया पकड़नेवाली राक्षसीका वध
- मुद्रित पृष्ठ
- 715, 716
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।