सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सो सब तव प्रताप रघुराई। नाथ न कछू मोरि प्रभुताई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दयह सब तो हे श्रीरघुनाथजी! आपहीका प्रताप है। हे नाथ! इसमें मेरी प्रभुता (बड़ाई) कुछ भी नहीं है॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 744 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सो सब तव प्रताप रघुराई। नाथ न कछू मोरि प्रभुताई।।
स्रोत अभिलेख 5.33 · पुस्तक पृ. 743, 744
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सो सब तव प्रताप रघुराई। नाथ न कछू मोरि प्रभुताई।।
English explanation
O Lord of Raghu’s line, all that was due to your might. My Lord, none of it was my own power.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सो | वह | that |
| सब | सब | all |
| तव | आपका | your |
| प्रताप | प्रताप; प्रभावशाली सामर्थ्य | might; potent influence |
| रघुराई | हे रघुवंश के स्वामी राम | O Rama, lord of Raghu’s line |
| नाथ | हे स्वामी | O Lord |
| न | नहीं | not |
| कछू | कुछ भी | any at all |
| मोरि | मेरी | my own |
| प्रभुताई | सामर्थ्य; प्रभुता | power; mastery |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.33
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 744
- सहायक विषय
- समुद्रके इस पार आना, सबका लौटना, मधुवन-प्रवेश, सुग्रीव-मिलन, श्रीराम-हनुमान्-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 743, 744
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।