सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनु सुत उरिन मैं नाहीं। देखेउँ करि बिचार मन माहीं।।
मूल पाठ
सुनु सुत उरिन मैं नाहीं। देखेउँ करि बिचार मन माहीं।।
पुनि पुनि कपिहि चितव सुरत्राता। लोचन नीर पुलक अति गाता।।
स्रोत अभिलेख 5.32 · पुस्तक पृ. 742, 743
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे पुत्र! सुन; मैंने मनमें [खूब] विचार करके देख लिया कि मैं तुझसे उऋण नहीं हो सकता। देवताओंके रक्षक प्रभु बार-बार हनुमान्जीको देख रहे हैं। नेत्रोंमें प्रेमाश्रुओंका जल भरा है और शरीर अत्यन्त पुलकित है॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 743 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सुनु सुत उरिन मैं नाहीं। देखेउँ करि बिचार मन माहीं।।
English explanation
Listen, my son: reflecting within my heart, I have realized that I am not free of my debt to you.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनु | सुनो | listen |
| सुत | हे पुत्र | O son |
| उरिन | ऋण से मुक्त | free of debt |
| मैं | मैं | I |
| नाहीं | नहीं हूँ | am not |
| देखेउँ | मैंने देखा; समझ लिया | I have seen; realized |
| करि | करके | having done |
| बिचार | विचार | reflection |
| मन | मन के | the heart |
| माहीं | भीतर | within |
2 पुनि पुनि कपिहि चितव सुरत्राता। लोचन नीर पुलक अति गाता।।
English explanation
Rama, protector of the gods, looks repeatedly at Hanuman; his eyes hold tears, and his body is intensely thrilled.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुनि | फिर | again |
| पुनि | फिर | again |
| कपिहि | कपि हनुमान को | at Hanuman, the monkey |
| चितव | देखते हैं | looks |
| सुरत्राता | देवताओं के रक्षक राम | Rama, protector of the gods |
| लोचन | नेत्रों में | in the eyes |
| नीर | आँसू | tears |
| पुलक | रोमांच; रोम खड़े होना | thrill; hair standing on end |
| अति | अत्यंत | intensely |
| गाता | शरीर | body |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.32
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 743
- सहायक विषय
- समुद्रके इस पार आना, सबका लौटना, मधुवन-प्रवेश, सुग्रीव-मिलन, श्रीराम-हनुमान्-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 742, 743
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।