सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनत बिहसि बोले रघुबीरा। ऐसेहिं करब धरहु मन धीरा।।
मूल पाठ
सुनत बिहसि बोले रघुबीरा। ऐसेहिं करब धरहु मन धीरा।।
अस कहि प्रभु अनुजहि समुझाई। सिंधु समीप गए रघुराई।।
स्रोत अभिलेख 5.51 · पुस्तक पृ. 760, 760
भावार्थ
मूल पाठ के बादयह सुनकर श्रीरघुवीर हँसकर बोले—ऐसे ही करेंगे, मनमें धीरज रखो। ऐसा कहकर छोटे भाईको समझाकर प्रभु श्रीरघुनाथजी समुद्रके समीप गये॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 760 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सुनत बिहसि बोले रघुबीरा। ऐसेहिं करब धरहु मन धीरा।।
English explanation
Hearing this, Rama, the hero of Raghu’s line, smiled and said, ‘We shall do just that; keep your heart patient.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनत | सुनते ही | on hearing |
| बिहसि | हँसकर; मुस्कराकर | smiling |
| बोले | बोले | said |
| रघुबीरा | रघुवंश के वीर राम | Rama, hero of Raghu’s line |
| ऐसेहिं | ऐसा ही | just so |
| करब | करेंगे | shall do |
| धरहु | रखो | keep; hold |
| मन | मन में | in your heart |
| धीरा | धैर्य | patience; composure |
2 अस कहि प्रभु अनुजहि समुझाई। सिंधु समीप गए रघुराई।।
English explanation
Having said this and reassured his younger brother, Lord Rama went near the ocean.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसा | thus |
| कहि | कहकर | having said |
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| अनुजहि | छोटे भाई लक्ष्मण को | to his younger brother Lakshmana |
| समुझाई | समझाकर | having reassured; explained to |
| सिंधु | समुद्र के | of the ocean |
| समीप | पास | near |
| गए | गए | went |
| रघुराई | रघुवंश के स्वामी राम | Rama, lord of Raghu’s line |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.51
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 760
- सहायक विषय
- समुद्र पार करनेके लिये विचार, रावणदूत शुकका आना और लक्ष्मणजीके पत्रको लेकर लौटना
- मुद्रित पृष्ठ
- 760, 760
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।