सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनत बिहसि बोला दसकंधर। अंग भंग करि पठइअ बंदर।।
मूल पाठ
सुनत बिहसि बोला दसकंधर। अंग भंग करि पठइअ बंदर।।
स्रोत अभिलेख 5.24 · पुस्तक पृ. 736, 736
भावार्थ
मूल पाठ के बादयह सुनते ही रावण हँसकर बोला—अच्छा तो, बंदरको अंग-भंग करके भेज (लौटा) दिया जाय॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 736 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सुनत बिहसि बोला दसकंधर। अंग भंग करि पठइअ बंदर।।
English explanation
Hearing this, ten-headed Ravana laughed and said, ‘Mutilate the monkey and send him away.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनत | सुनकर | hearing this |
| बिहसि | हँसकर | laughing |
| बोला | बोला | said |
| दसकंधर | दस सिर वाला रावण | ten-headed Ravana |
| अंग | शरीर के अंग | bodily limbs |
| भंग | भंग करना | mutilation |
| करि | करके | having done |
| पठइअ | भेज दिया जाए | let him be sent away |
| बंदर | वानर को | the monkey |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.24
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 736
- सहायक विषय
- हनुमान्-रावण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 736, 736
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।