सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सीता मन भरोस तब भयऊ। पुनि लघु रूप पवनसुत लयऊ।।
मूल पाठ
सीता मन भरोस तब भयऊ। पुनि लघु रूप पवनसुत लयऊ।।
स्रोत अभिलेख 5.16 · पुस्तक पृ. 729, 729
भावार्थ
मूल पाठ के बादतब (उसे देखकर) सीताजीके मनमें विश्वास हुआ। हनुमान्जीने फिर छोटा रूप धारण कर लिया॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 729 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सीता मन भरोस तब भयऊ। पुनि लघु रूप पवनसुत लयऊ।।
English explanation
Then confidence arose in Sita’s heart. Hanuman, son of the wind god, again assumed a small form.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सीता | सीता के | Sita’s |
| मन | मन में | in the heart |
| भरोस | विश्वास | confidence |
| तब | तब | then |
| भयऊ | हुआ | arose |
| पुनि | फिर | again |
| लघु | छोटा | small |
| रूप | रूप | form |
| पवनसुत | पवनदेव के पुत्र हनुमान ने | Hanuman, son of the wind god |
| लयऊ | ले लिया; धारण किया | assumed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.16
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 729
- सहायक विषय
- श्रीसीता-हनुमान्-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 729, 729
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।