सुन्दरकाण्ड · दोहा 16 · दोहा/सोरठा
सुनु माता साखामृग नहिं बल बुद्धि बिसाल।
सुनु माता साखामृग नहिं बल बुद्धि बिसाल।
प्रभु प्रताप तें गरुड़हि खाइ परम लघु ब्याल।।16।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 5.16 · पुस्तक पृ. 729, 729
भावार्थ और शब्दार्थ
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1सुनु माता साखामृग नहिं बल बुद्धि बिसाल।
हे माता, सुनिए: वानरों में विशाल बल और बुद्धि नहीं है।
English explanation
Listen, mother: monkeys do not possess great strength or intelligence.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनु | सुनिए | listen |
| माता | हे माता | O mother |
| साखामृग | वानरों में | in monkeys |
| नहिं | नहीं है | there is no |
| बल | शक्ति | strength |
| बुद्धि | बुद्धि | intelligence |
| बिसाल | विशाल; महान | great |
2 प्रभु प्रताप तें गरुड़हि खाइ परम लघु ब्याल।।16।।
प्रभु के प्रताप से अत्यंत छोटा साँप भी गरुड़ को खा सकता है।
English explanation
Through the Lord’s might, even a very small snake can devour Garuda.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रभु | स्वामी राम के | of Lord Rama |
| प्रताप | प्रताप; प्रभावशाली शक्ति | might; power |
| तें | से; के कारण | through; because of |
| गरुड़हि | गरुड़ को | Garuda, the divine eagle |
| खाइ | खा सकता है | can devour |
| परम | अत्यंत | extremely |
| लघु | छोटा | small |
| ब्याल | साँप | snake |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 16
- स्रोत अभिलेख
- 5.16
- सहायक विषय
- श्रीसीता-हनुमान्-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 729, 729
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